भगवान का अर्थ
भगवान का अर्थ हम लोग क्या मानते है यह हमारी अपनी रुचि का विषय है, पर क्या आप जानते है की वर्षो से इस नाम का प्रयोग करके लाखो लोगो ने अपनी गलतियों को छिपाया है। अक्सर हम हर चीज में भगवान को बीच मे लाकर खड़ा कर देते है, चाहे वह हमारी कोई भी खुद की गई गलती ही क्यों न हो। वास्तव में यह एक गलत अवधारणा समय के चलते बनी हुई है। हम शायद इतने सक्षम नहीं है की भगवान के स्वरूप के अस्तित्व को समझ सके हम नही जान सकते की भगवान है या नहीं इसकी कल्पना करना भी बिल्कुल तर्कहीन बात है।पर हम हमेशा इस बात पर बहस करना चाहते है की भगवान है या नहीं है वह देख रहा है या नहीं वास्तव में इस बात में तर्क है लोग हमेशा चाहते है की वो अपनी गलतियों को दुसरो के ऊपर थोप दे यही परंपरा सदियों से चली आ रही है आज भी सतत रूप से चल रही है। तो लोगो ने भगवान शब्द खोजा और उसी पर निर्भर हो गए। लेकिन यह बात यही तक तो रहनी नही थी की यह एक युग में हो जाता परंतु फिर भी जब इसकी खोज हुई तब लोग जागरूक थे क्योंकि यह सब उन्ही लोगो ने बनाया फिर जब वो लोग ही नहीं रहे और पीढ़ी बदलती गई तो यह अंधविश्वास में बदलता गया। आज के इस...