सकारात्मक सोच

 क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि हम क्या सोच रहे है? और क्यों सोच रहे है। असल में हमारी जिंदगी के काफी सारे अच्छे पल सिर्फ सोचने में ही निकल जाते है। ध्यान देने वाली बात ये है कि हम नकारात्मक विचार को जल्द ही पकड़ लेते है जबकि सकारात्मक विचार को नहीं पकड़ पाते। आइए जानते है कि हम अपनी सोच को केसे सकारात्मकता कि तरफ ले जाए।

सोचना मानव कि एक साधारण प्रक्रिया है। हर व्यक्ति सोचता है। और मजे कि बात यह है कि व्यक्ति हमेशा नकारात्मक बातो को ज्यादा सोचता है और उन्ही में उलझ कर फस जाता है। आप किसी भी परिस्थिति में क्यों न हो चाहे वह आर्थिक,पारिवारिक,शारीरिक या कोई सी भी समस्या क्यों न हो आप उस स्थिति में नकारात्मक विचारो के एक जाल में फस जाते है। और समस्या और दुगुनी लगने लगा जाती है। 

आपको यह तो पता होगा की आपका जीवन है तो इसमें सुख और दुख दोनों ही स्थितियां बनेगी। और साथ में यह भी जान लीजिए यदि एक ही स्थिति में आप रहे तो आप रह ही नहीं पाएंगे। 

सकारात्मकता की तरफ आगे बढ़ने का एकमात्र उपाय है - प्रैक्टिकली थिंकिंग और स्वयं पर विश्वास।

हमारे दिमाग में विचार आयेंगे किन्तु हम उन विचारो को प्रायोगिक तौर पर सोचकर उनमें से सकारात्मक विचार रख सकते है और नकारात्मक विचारो को दूर कर सकते है। विचार एक सामान्य स्थिति है किन्तु इसको हम किस तरह अच्छी बातो को ध्यान में रखकर अच्छा बना सकते है ये एक बार हम करेंगे तभी हम पता चलेगा। आप अपने आप में कुछ घंटे अपने अच्छे पल याद करके देखिए और मुस्कुराइए यकीन मानिए आप फलेसे ज्यादा खुश रहेंगे।

वर्तमान समय में हमे अपनी खुशी के लिए दूसरों पर निर्भर होना पड़ता है आजकल के समय में यदि कुछ नहीं मिला, गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप हो गया, किसी ने कुछ कह दिया तो हम दुखी हो जाते है। इसका मतलब हम अपने स्वयं के साथ समय नहीं बताते हम खुद को नहीं जानते बस हम ढूंढते है तात्कालिक खुशी जो स्वाभाविक है कुछ ही समय के लिए होती है।

सकारात्मक जीवन जीने के लिए एक बार हम स्वयं को पहचाने, हम खुद से बातें करे, और और मन में कोई बात न रखे हमेशा सच्चे बने खुद से कभी धोखा ना करे। यकीन मानिए आप जिस दिन खुद के साथ धोखा करना बन्द कर देंगे और किसी दूसरे से उम्मीद करना बन्द कर देंगे तो आप शत प्रतिशत खुश रहेंगे और सकारात्मक बने रहेंगे।

सकारात्मक बनना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन सकारात्मक बने रहना बहुत बड़ी बात होती है। बहुत से लोग तुरन्त मोटिवेट होकर खुश रह लेते है फिर कुछ पल के बाद वही स्थिति में पहुंच जाते है। आप ऐसा मत करिए स्थिति को बहुत अच्छी तरह समझिए उसके बाद स्वयं से बात करके आराम से सोचकर ही कोई भी फैसले लीजिए। 

भारत में अनेक मोटिवेशनल बाते करने वाले लोग आपको मिलेंगे किन्तु किसी का कोई तरीका तब तक काम नहीं करेगा जब तक आप तैयार ना हो। 

धन्यवाद्

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