शिक्षा, महत्व एवं प्रभाव
''शिक्षा, एक सभ्य समाज के लिए सर्वोत्तम उपाय है।''
'' शिक्षा जीवन का अभिन्न अंग है, जिसके बिना जीवन निरर्थक है।''
शिक्षा को जीवन का आधार कहना थोड़ा भी अनुचित नहीं लगता। शिक्षा हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। एक शिक्षित व्यक्ति और एक अशिक्षित व्यक्ति के जीवन को देखकर हम बहुत अच्छी तरह फर्क कर सकते है। हिन्दू धर्म में शिक्षा को तो बहुत पहले से ही एक आवश्यक अंग जीवन के लिए मना गया है। भारत हमेशा से ही विश्व गुरु रहा है। विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय हो जिसमे हम तक्षशिला कि बात करे या नालंदा विश्वविद्यालय की दोनों ही प्राचीन काल से ही भारतीयों के साथ साथ विदेशियों के लिए भी शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान रहे है। हमे यह कहने में गर्व महसूस होना चाहिए कि हम उस देश के निवासी है जहां प्राचीन समय से शिक्षा पर बल दिया जा रहा है। हा यह बात थोड़ा अलग है कि शिक्षा में सभी को समान अधिकार देने के क्षेत्र में भारत हमेशा से ही पीछे रहा है चाहे हम बात करे पहले कि या अभी के समय की हमारे सामने हमेशा से यह परेशानी रही है कि किस तरह हम शिक्षा को सभी के लिए समान अवसर निकाल दे इसके लिए काफी कोशिश सरकार ने भी करी है किन्तु कुछ रूढ़िवादियों कि वजह से समाज के कुछ वर्ग अभी भी शिक्षा से वंचित है। मुझे अफसोस होता है कहने में कि श्रीकृष्ण, श्रीराम, आर्यभट्ट, अर्जुन, तुलसीदास, वाल्मीकि जी कि जन्मभूमि में आज भी बहुत से वर्ग शिक्षा से वंचित है। जिस भूमि में महानतम ग्रंथ रामायण, महाभारत, ऋग्वेद, और अन्य महत्वपूर्ण ग्रंथो का उदय हुआ आज वहा के कुछ वर्ग शिक्षा से वांचित है। जागरूकता कि अत्यंत आवश्यकता होने पर ही आज शिक्षा के लिए अनेकों कार्यक्रम चलाए जा रहे है किन्तु कुछ खास प्रभाव नहीं पड़ रहा है।
मुझे लगता है कि यदि समाज को एक आची दिशा देनी है तो सर्वप्रथम शिक्षा के क्षेत्र में प्रयास कि आवश्यकता है, क्योंकि यदि शिक्षा के प्रति लोगो में जागरूकता आ गई और लोगो को इसमें रुचि उत्पन्न करने में हम सक्षम हो गए तो हम हमारे लिए एक सभ्य समाज का निर्माण करने में सक्षम है।
आज शिक्षा के आभाव के कारण दंगे, आतंकवाद, जातिवाद, द्वेषपूर्ण भावना, धार्मिक अपराध, बेरोजगारी, और अन्य सामाजिक अपराधों में वृद्धि हुई है।
एक अच्छे समाज के लिए सर्वोत्तम उपाय शिक्षा व्यवस्था को सही करना एवं हर वर्ग को चाहे वह अमीर हो या गरीब, पुरुष है या महिला, कोई भी ही सभी तक शिक्षा को पहुचाना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
महत्व - शिक्षा का महत्व इतना अधिक है कि एक लेख इसके लिए बहुत छोटी सी चीज है। ज्ञान तो वह धन है जो कभी खत्म नहीं होता। शिक्षा का सबसे अच्छा महत्व इंसान में समझ विकसित करके उसे मानव बनना ही है, इस दुनिया में अनेको जीव - जंतु रहते है किन्तु ईश्वर ने हमे सोचने और समझने की को शक्ति प्रदान की है वह किसी अन्य जीव में नहीं है, किन्तु हर चीज के दो पहलू तो होते ही है, कुछ शिक्षा का सदुपयोग करते है तो कुछ दुरुपयोग। शिक्षा, जीवन को सुखद बनाने के लिए सर्वोत्तम उपाय है, और शिक्षा से ही मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
हमे शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए और इस तरह से कि हार व्यक्ति को शिक्षा दी जाए। शिक्षा भी ना केवल किसी एक ओर झुके अपितु सभी ओर समान रूप से शिक्षा का वितरण हो।
शिक्षा हम सभ्य बनाती है, हमे जीवन जीने के तरीके सिखाती है, इस धन का उपयोग करके हम और भी धनवान होते है यह धन जीवन पर्यन्त हमारे साथ जुड़ा रहने वाला धन है।
हमे व्यावहारिक शिक्षा पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा। केवल विषय आधारित शिक्षा के व्यक्ति के अंदर मानवता और एक अच्छे इंसान के गुण नहीं पनप पाते।
एक पंक्ति में शिक्षा जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अंग है।
समाज पर प्रभाव - शिक्षा एक व्यक्ति, समाज, धर्म, देश, या किसी भी स्थान, विषय वस्तु पर अपना गहन प्रभाव डालती है। एक शिक्षित समाज और एक अशिक्षित समाज को देखकर ही व्यक्ति फर्क कर देता है। शिक्षा हमेशा उत्तम मार्ग प्रशस्त करती है।
आज एक शिक्षित देश, अशिक्षित देश से बहुत आगे निकल चुके है। हर क्षेत्र में शिक्षा का प्रभाव देखा जा सकता है।
धन्यवाद
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